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भारत सम्मान के संपादक जितेन्द्र कुमार जयसवाल के पिता का निधन समाज सेवा और सादगी के प्रतीक थे।

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विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित।

पिता जी अब नहीं रहे…विनम्र श्रद्धांजलि। मेरे पिता जी केवल एक हिम्मती इंसान ही नहीं थे, बल्कि त्याग और सादगी के प्रतीक थे। उनका जीवन “नेकी कर, दरिया में डाल” की कहावत का सच्चा उदाहरण था।उन्होंने हमेशा दूसरों की मदद की, बिना किसी अपेक्षा या दिखावे के। वे कहते थे—“भलाई अगर गिनाने लगो तो वह सौदा हो जाता है, नेकी नहीं।” यही सोच उनकी पहचान बन गई।सबसे बड़ी बात, उन्होंने जीते-जी अपनी पैतृक संपत्ति पर पूर्ण दावा नहीं किया। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि उनके लिए पारिवारिक सद्भाव और रिश्तों की कीमत किसी भी ज़मीन-जायदाद से बड़ी थी। उन्होंने हमेशा घर-परिवार को जोड़े रखने, सबको साथ लेकर चलने और

अपने हिस्से से ज़्यादा दूसरों को देने का ही रास्ता चुना।उनका यह त्याग और उदारता हमें बताती है कि असली दौलत ज़मीन या संपत्ति नहीं, बल्कि इंसान का चरित्र, साहस और प्यार है।पिता जी का जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनका जीवन-दर्शन, उनकी नेकी और उनकी निस्वार्थ सोच हमारे भीतर हमेशा जीवित रहेगी। वे हमें सिखा गए कि इंसान का असली कद उसके त्याग और करुणा से नापा जाता है, न कि उसकी संपत्ति से।आज हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह वचन लेते हैं कि उनकी शिक्षाओं और मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे। उनका प्यार, साहस और नेकी हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।पिता जी अमर रहेंगे हमारी यादों और कर्मों में। 🙏🕊️LOVE YOU DADDY

Khilawan Prasad Dwivedi

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