Chhattisgarh

पत्रकारिता की आड़ में कथित वसूली का खेल! खबरों की विश्वसनीयता पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग।

पत्रकारिता की आड़ में कथित वसूली का खेल! खबरों की विश्वसनीयता पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग विज्ञापन और समाचार प्रकाशन के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतें; डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पत्रकारिता की पहचान और विश्वसनीयता को लेकर उठी बहस, प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षापत्रकारिता समाज की आवाज और लोकतंत्र का महत्वपूर्ण प्रहरी है।

लेकिन जब इसी पहचान की आड़ में कथित तौर पर दबाव बनाने, भ्रामक खबरें प्रसारित करने और आर्थिक लाभ लेने की शिकायतें सामने आती हैं, तो इसका असर केवल संबंधित व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।बिलासपुर में इस मुद्दे को लेकर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा द्वारा शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

ज्ञापन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पत्रकारिता के नाम से सक्रिय कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से भ्रामक सामग्री प्रसारित करने तथा विज्ञापन या समाचार प्रकाशन के नाम पर दबाव बनाने जैसी शिकायतों का उल्लेख किया गया है।आरोपों की गंभीरता साक्ष्यों से तय होगीकुछ सार्वजनिक चर्चाओं में छोटी रकम के कथित लेनदेन का भी जिक्र हुआ है।

हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि और किसी व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण उपलब्ध हुए बिना किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में शिकायत, साक्ष्य और जांच के निष्कर्षों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना जरूरी है।प्रशासन को यह देखना होगा कि क्या संबंधित शिकायतों के साथ कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं? क्या कथित दबाव, धमकी या आर्थिक मांग से जुड़े संदेश, भुगतान विवरण अथवा अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है? यदि किसी स्तर पर अवैध गतिविधि प्रमाणित होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।डिजिटल पत्रकारिता पर संदेह नहीं, गलत गतिविधियों पर कार्रवाई जरूरीडिजिटल मीडिया ने पत्रकारिता को व्यापक मंच दिया है। आज स्वतंत्र पत्रकार और छोटे डिजिटल समाचार संस्थान भी जनहित के मुद्दे उठाते हैं।

इसलिए केवल किसी के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े होने के आधार पर उसकी पत्रकारिता को संदिग्ध मानना उचित नहीं है।मुद्दा माध्यम का नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली का है। खबरों की तथ्यात्मक पुष्टि, जिम्मेदार संपादन, संबंधित पक्ष का पक्ष लेने की कोशिश और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था—ये सभी विश्वसनीय पत्रकारिता के जरूरी आधार हैं।प्रशासन की निष्पक्षता ही तय करेगी आगे की दिशाअब शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों की निष्पक्ष जांच कराए।

शिकायतें प्रमाणित होती हैं तो दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और आरोप निराधार पाए जाते हैं तो किसी की प्रतिष्ठा को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे। जांच का उद्देश्य किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पत्रकारिता के नाम पर होने वाली कथित गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना होना चाहिए।क्या पत्रकारिता के नाम पर कथित दबाव और आर्थिक मांगों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी?क्या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

?क्या डिजिटल पत्रकारिता की स्वतंत्रता और उसकी विश्वसनीयता—दोनों की रक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनेगी?क्या जांच केवल ज्ञापन तक सीमित रहेगी या उसका कोई ठोस परिणाम भी सामने आएगा?पत्रकारिता सम्मान और जिम्मेदारी का पेशा है, दबाव बनाने या निजी लाभ का माध्यम नहीं। जो इस पहचान का दुरुपयोग करता है, उसे कानून के दायरे में जवाब देना चाहिए। लेकिन जांच का आधार आरोप नहीं, प्रमाण होना चाहिए—यही निष्पक्ष पत्रकारिता और न्यायपूर्ण व्यवस्था की असली कसौटी है।

Khilawan Prasad Dwivedi

Sakti Samachar News is one of the biggest Hindi News portal where you can read updated Hindi News on Politics, Sports, Business, World, Entertainment etc.

Related Articles