ब्लैक मेलर्स’ का आतंक!!खुद को पत्रकार बताकर छात्रावास अधीक्षकों से उगाही का खेल, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
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ब्लैक मेलर्स’ का आतंक!!खुद को पत्रकार बताकर छात्रावास अधीक्षकों से उगाही का खेल, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग..रायगढ़ शिक्षा के मंदिरों और सरकारी छात्रावासों में इन दिनों एक अजीब किस्म का ‘भय का माहौल’ पनप गया है। छात्र जीवन को सुरक्षित और अनुशासित रखने के उद्देश्य से संचालित रायगढ़ जिले के विभिन्न छात्रावास और आश्रम, अब कुछ तथाकथित और स्वयंभू ‘पत्रकारों’ या ‘मीडिया प्रतिनिधियों’ की गिद्ध दृष्टि का शिकार हो गए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को एक ज्ञापन सौंपकर इस भयावह स्थिति की ओर इशारा किया है, जो न केवल प्रशासनिक कामकाज में बाधा डाल रहा है, बल्कि सरकारी तंत्र की छवि को भी धूमिल करने का एक सुनियोजित प्रयास लग रहा है।निरीक्षण के नाम पर उगाही का ‘ब्लैक ड्रामा’संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि खरसिया और धरमजयगढ़ विकासखंड में कुछ असामाजिक तत्व लगातार छात्रावासों में पहुंचकर खुद को मीडिया से जुड़ा होने का रौब झाड़ते हैं। इनका मुख्य काम शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना नहीं, बल्कि हॉस्टल अधीक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। ये लोग नियमों की आड़ में छात्रावासों के भीतर घुसपैठ करते हैं, और फिर कथित तौर पर ‘कमियां’ निकालने के नाम पर अधीक्षकों को डराते-धमकाते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि इन लोगों द्वारा अपनी खबरों का भय दिखाकर खुलेआम धनराशी की मांग करने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे मेहनतकश सरकारी कर्मचारियों के बीच दहशत का वातावरण निर्मित हो गया है।प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती, जवाबदेही पर सवाल..छात्रावास अधीक्षक संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि सरकारी छात्रावासों की निगरानी और निरीक्षण के लिए शासन का अपना एक स्पष्ट तंत्र है। विभागीय अधिकारी, जिला स्तरीय नोडल अधिकारी और शासन-संचालनालय स्तर के अधिकृत लोग ही निरीक्षण के लिए जवाबदेह हैं। यदि कहीं कोई अनियमितता होती है, तो उसके निराकरण के लिए विभागीय प्रोटोकॉल और कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट है। ऐसे में, किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति का खुद को ‘मीडिया’ बताकर निरीक्षण करना और कानून को अपने हाथ में लेकर वसूली करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।प्रशासन की चुप्पी पर संघ की तीखी प्रतिक्रिया..छात्रावास अधीक्षक संघ अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। संघ ने कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट मांग की है कि ऐसे तथाकथित तत्वों के छात्रावासों में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। यदि इन लोगों के विरुद्ध समय रहते सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल अधीक्षकों का मनोबल टूटेगा, बल्कि जिले की शिक्षा व्यवस्था भी डगमगा सकती है। संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे प्रशासन की छवि खराब करने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इन ब्लैकमेलर्स के खिलाफ क्या ‘तीखा’ कदम उठाता है, या फिर यह खेल इसी तरह बदस्तूर जारी रहेगा।
