कुलगाम में टारगेट किलिंग: पहचान पूछकर आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के मजदूरों पर बरसाईं गोलियां, प्रदेश में शोक की लहर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मृतक श्रमिक को विनम्र श्रद्धांजलि घायल श्रमिक के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की

कुलगाम में टारगेट किलिंग: पहचान पूछकर आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के मजदूरों पर बरसाईं गोलियां, प्रदेश में शोक की लहर जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की राह में बाधा डालने के नापाक इरादे से पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने एक बार फिर निर्दोष नागरिकों को अपना निशाना बनाया है। घाटी के कुलगाम जिले में आतंकियों ने एक बेहद कायराना और नृशंस वारदात को अंजाम देते हुए छत्तीसगढ़ के निवासी प्रवासी मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस लक्षित हमले (टारगेट किलिंग) ने न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया है। यह अमानवीय कृत्य आतंकवादियों की उस हताशा को दर्शाता है, जिसके तहत वे निहत्थे और रोजी-रोटी कमाने गए गरीब मजदूरों में खौफ पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।खौफनाक मंजर: नाम और पहचान पूछकर की गई ताबड़तोड़ फायरिंग..प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस वक्त घटी जब मजदूर अपने काम के सिलसिले में वहां मौजूद थे। आतंकवादियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। चश्मदीदों और शुरुआती रिपोर्टों के हवाले से यह बात सामने आई है कि हथियारबंद आतंकियों ने पहले इन मजदूरों को रोका, उनकी पहचान पूछी और नाम जानने के बाद उन पर अत्यंत करीब से गोलियों की बौछार कर दी। इस बर्बर हमले में छत्तीसगढ़ के रहने वाले दो मजदूरों, दीपक रात्रे और भूपेंद्र कुमार को निशाना बनाया गया। प्रारंभिक सूचनाओं में दोनों मजदूरों की शहादत की बात कही गई थी, हालांकि आधिकारिक सूत्रों द्वारा फिलहाल एक मौत की स्पष्ट रूप से पुष्टि की गई है, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा है।छत्तीसगढ़ के सक्ती और बलौदाबाजार से जुड़े हैं तार..इस आतंकी घटना के शिकार हुए मजदूरों का संबंध सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की माटी से है। मृतकों और घायलों की शिनाख्त दीपक रात्रे और भूपेंद्र के रूप में की गई है, जो मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सक्ती और बलौदाबाजार जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। ये युवा अपने परिवारों के भरण-पोषण और एक बेहतर भविष्य की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम गए हुए थे। जैसे ही इस हृदयविदारक घटना की खबर उनके पैतृक गांवों तक पहुंची, वहां मातम पसर गया और पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश की लहर दौड़ गई है।सुरक्षाबलों का सघन तलाशी अभियान, पूरे इलाके की सख्त घेराबंदी..इस खून-खराबे की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। आतंकवादियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को सील कर दिया गया है और समूचे क्षेत्र की कड़ी घेराबंदी कर दी गई है। सुरक्षाबलों द्वारा एक बड़े स्तर का सघन सर्च ऑपरेशन (तलाशी अभियान) चलाया जा रहा है, ताकि इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाले आतंकियों को जल्द से जल्द उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सके। घाटी में चप्पे-चप्पे पर चौकसी बढ़ा दी गई है और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक, हरसंभव सरकारी मदद का दिया आश्वासन..छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस नृशंस और कायरतापूर्ण आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इस घटना पर गहरी संवेदना और दुख व्यक्त करते हुए कहा कि निर्दोष और निहत्थे मजदूरों पर किया गया यह हमला मानवता पर कलंक है और आतंकियों की बुजदिली का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि दुख की इस विकट घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। राज्य सरकार लगातार जम्मू-कश्मीर प्रशासन और शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में बनी हुई है। इसके साथ ही, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मजदूर को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा और हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव तक लाया जाए और शोक संतप्त परिजनों को तत्काल राहत पहुंचाई जाए।यह घटना एक बार फिर इस बात को रेखांकित करती है कि घाटी में शांति बहाली के प्रयासों के बीच सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद अभी भी आम नागरिकों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि, सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और कठोर कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि इस तरह के कायरतापूर्ण कृत्यों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।