Chhattisgarh

राज्यसभा में मुखर आवाज बने कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह, रायगढ़ के मुद्दों को दिलाई नई पहचान सक्रियता की मिसाल

दो साल में सक्रियता की मिसाल: राज्यसभा में मुखर आवाज बने कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह, रायगढ़ के मुद्दों को दिलाई नई पहचान रेल टर्मिनल पर पहल,ग्रीन एनर्जी विजन और आदिवासी हितों की मुखर आवाज राज्यसभा सांसद कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने दो साल के कार्यकाल में सक्रियता की नई मिसाल पेश की है। संसद में लगभग शत-प्रतिशत उपस्थिति और छत्तीसगढ़ के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने के साथ उन्होंने रायगढ़ के विकास को नई दिशा देने की ठोस पहल की है।*रायगढ़। राज्यसभा सांसद कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने संसदीय कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और इस अवधि में उन्होंने सक्रियता, उपस्थिति और मुद्दों की प्रभावी पैरवी के जरिए खुद को एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है। संसद के लगभग हर सत्र में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाले सांसद ने न केवल रायगढ़ बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ से जुड़े अहम विषयों को सदन में प्रमुखता से उठाया।सांसद सिंह का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने का अर्थ केवल पद धारण करना नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं को नीति निर्माण के केंद्र तक पहुंचाना है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने कार्यकाल में स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई मुद्दों पर हस्तक्षेप किया। *रेल टर्मिनल और ट्रेनों के ठहराव पर जोर*रायगढ़ में तीन दशक पहले घोषित रेल टर्मिनल परियोजना को लेकर सांसद ने इसे अपनी प्राथमिकता में रखा है। गौरतलब है कि तत्कालीन रेल मंत्री नितीश कुमार के कार्यकाल में इस परियोजना का शिलान्यास हुआ था, जिसमें उनके पिता और तत्कालीन सांसद स्व. सुरेंद्र प्रताप सिंह की उपस्थिति रही थी। राजपरिवार द्वारा रेलवे के लिए 1169 एकड़ भूमि दान किए जाने का उल्लेख करते हुए सांसद ने इस आधार पर कई ट्रेनों के ठहराव की मांग उठाई, जिनमें से अधिकांश को मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही रायगढ़ से नई ट्रेनों के संचालन के प्रयास भी जारी हैं।*ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव: ग्रीन एनर्जी और न्यूक्लियर पर फोकस*ऊर्जा के क्षेत्र में सांसद ने भारत की बदलती दिशा को रेखांकित करते हुए कहा कि देश वर्ष 2035-36 तक कोयले पर निर्भरता कम कर ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उनके अनुसार, न्यूक्लियर एनर्जी भविष्य में भारत के विकास का प्रमुख आधार बनेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराने कोयला संयंत्रों की जमीन पर सोलर प्लांट स्थापित कर हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। *औद्योगिक विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन जरूरी*जिले में औद्योगिक विस्तार और उसके विरोध को लेकर सांसद का मानना है कि विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को उनका उचित हक नहीं मिलने के कारण विरोध की स्थिति बनती है। डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) के तहत मिलने वाली राशि के उपयोग में पारदर्शिता की कमी पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि अपेक्षित लाभ अब भी प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहा है। *सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा: टैगोर भवन की पहल*रायगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से सांसद ने शहर में एक भव्य सांस्कृतिक भवन ‘टैगोर सदन’ के निर्माण की दिशा में पहल की है। इसकी घोषणा चक्रधर महोत्सव के मंच से केंद्रीय स्तर पर की जा चुकी है और जल्द ही इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। *बीएचईएल प्रकरण: 20 अधिकारियों को दिलाई राहत*सांसद के हस्तक्षेप से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला भोपाल स्थित बीएचईएल से सामने आया, जहां अजा-अजजा वर्ग के 20 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का नोटिस दिया गया था। सांसद ने आयोग के माध्यम से इस मामले को उठाया और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से संवाद कर निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया। परिणामस्वरूप, सभी अधिकारियों को पुनः उनके पद पर बहाल कर दिया गया। इस पहल को कर्मचारियों ने सराहा।*डीएमएफ में सुधार की सिफारिश अधूरी*खनिज क्षेत्रों में विकास के लिए बनाई गई डीएमएफ योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी को लेकर सांसद ने कलेक्टर के स्थान पर लोकसभा सांसद को अध्यक्ष बनाने की सिफारिश का उल्लेख किया, हालांकि यह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका।*नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ और विकास की उम्मीद*राज्यसभा में नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ पर अपने वक्तव्य में सांसद ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि अब बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण पर भी जोर दिया।*लैलूंगा को पर्यटन हब बनाने की योजना*अपने गृहक्षेत्र लैलूंगा के विकास को लेकर सांसद ने इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना साझा की। केलो नदी के उद्गम स्थल और आसपास की गुफाओं को आकर्षक रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। डीएमएफ के माध्यम से चरणबद्ध विकास का खाका तैयार किया जा रहा है। *सक्रियता के साथ अपेक्षाओं की कसौटी*दो वर्षों के कार्यकाल में कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह ने संसद में सक्रिय उपस्थिति, विभिन्न मुद्दों पर हस्तक्षेप और विकास योजनाओं की पहल के जरिए अपनी भूमिका को स्थापित करने का प्रयास किया है। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक प्रभाव जमीन पर कितना दिखाई देता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। रायगढ़ की जनता की अपेक्षाएं अब इन प्रयासों के ठोस परिणामों पर टिकी हैं।

Khilawan Prasad Dwivedi

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