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रायगढ़ में कानून का सिंहनाद अपराधियों के लिए काल,जनता के लिए ढाल बने एसएसपी शशिमोहन सिंह रायगढ़

रायगढ़ में कानून का सिंहनाद — अपराधियों के लिए काल,जनता के लिए ढाल बने एसएसपी शशिमोहन सिंह रायगढ़ में कानून का नया चेहरा बने एसएसपी शशिमोहन रायगढ़ जिले में इन दिनों अपराधियों के बीच यदि किसी नाम का सबसे ज्यादा खौफ है, तो वह है एसएसपी शशिमोहन सिंह। बिना अनावश्यक प्रचार और बिना दिखावटी पुलिसिंग के,बेहद कम समय में जिस तरह उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था को नई धार दी है, वह उनकी प्रशासनिक क्षमता,दृढ़ इच्छाशक्ति और संवेदनशील नेतृत्व का प्रमाण बन चुका है।*रायगढ़ । जिले की फिजाओं में इन दिनों एक बदलाव साफ महसूस किया जा सकता है। गलियों से चौक-चौराहों तक, व्यापारियों से आम नागरिकों तक और अपराधियों से लेकर पुलिस महकमे तक — हर जगह एक नाम चर्चा के केंद्र में है, शशिमोहन सिंह। यह चर्चा किसी दिखावे, प्रचार या राजनीतिक चमक-दमक की नहीं, बल्कि उस शांत लेकिन निर्णायक पुलिसिंग की है जिसने कम समय में रायगढ़ के कानून व्यवस्था के ढांचे को नई मजबूती दी है।जिले भर में सट्टा,जुआ,कबाड़, साइबर अपराध,हत्या,लूट,अपहरण और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर जिस आक्रामक रणनीति के साथ कार्रवाई हुई है, उसने वर्षों से अपराध की जड़ों में बैठे तत्वों को हिला दिया है। अपराधियों को अब यह एहसास होने लगा है कि रायगढ़ में कानून केवल कागजों में नहीं, जमीन पर चलता है—और उसके केंद्र में हैं शशिमोहन सिंह।उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पुलिसिंग को शोर नहीं, असर का माध्यम बनाया। न अनावश्यक बयानबाजी,न कैमरों के सामने दिखावटी सख्ती—बल्कि सीधी कार्रवाई, तेज निर्णय और परिणाम देने वाली कार्यशैली।बिना किसी राजनीतिक दबाव या रसूख के प्रभाव में आए,उन्होंने साफ संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।आईपीएस शशिमोहन के “आघात”, “अंकुश”और “प्रहार” जैसे अभियानों ने अपराध जगत में भय की ऐसी रेखा खींची है कि असामाजिक तत्वों की गतिविधियां स्वतः सिमटती दिखाई दे रही हैं। थाना स्तर से लेकर फील्ड तक उनकी सतत निगरानी ने पूरे पुलिस विभाग में नई कसावट और जवाबदेही पैदा की है। जवानों की मुस्तैदी बढ़ी है, कार्रवाई की गति तेज हुई है और अपराधियों के बच निकलने की गुंजाइश लगातार कम हुई है। लंबे समय बाद रायगढ़ में यह माहौल बना है कि आम आदमी पुलिस को भरोसे की नजर से देख रहा है। व्यापारी निडर महसूस कर रहे हैं, महिलाएं अधिक सुरक्षित वातावरण का अनुभव कर रही हैं और युवाओं में पुलिस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, सामाजिक भी है।आईपीएस शशिमोहन सिंह की एक और खास पहचान उनकी “सोशल पुलिसिंग” है।खेल,जागरूकता कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी ने पुलिस और जनता के बीच वर्षों बढती दूरी को कम किया है।सख्ती और संवेदनशीलता का ऐसा संतुलन विरले अधिकारियों में ही दिखाई देता है। आज रायगढ़ में अपराधियों के बीच पुलिस का नहीं,सीधे एसएसपी का खौफ सुनाई देता है।वहीं शरीफ नागरिकों की जुबान पर पुलिस के लिए सम्मान और विश्वास लौटता नजर आता है।यह केवल एक अधिकारी की कार्यशैली नहीं, बल्कि उस नेतृत्व का उदाहरण है जो वर्दी की ताकत को जनता की सुरक्षा और न्याय की भावना से जोड़ता है।सच कहा जाए तो एसएसपी शशिमोहन सिंह ने यह साबित कर दिया है कि यदि नेतृत्व ईमानदार, निडर और संकल्पित हो,तो कानून की आवाज धीमी जरूर हो सकती है,लेकिन उसका असर बेहद गूंजदार होता है।

Khilawan Prasad Dwivedi

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