रायगढ़ फर्स्ट विजन के साथ आगे बढ़ते कलेक्टर श्रीमान मयंक चतुर्वेदी जीरो डिस्क्रिप्शन’ कार्यशैली से बढ़ा जनता का भरोसा प्रचार से दूरी काम से पहचान एक साल में प्रशासनिक व्यवस्था में दिखा बड़ा बदलाव

रायगढ़ फर्स्ट विजन के साथ आगे बढ़ते कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी जीरो-डिस्क्रिप्शन’ कार्यशैली से बढ़ा जनता का भरोसा प्रचार से दूरी, काम से पहचान… एक साल में प्रशासनिक व्यवस्था में दिखा बड़ा बदलाव लोकतंत्र की प्रशासनिक व्यवस्था में कई अधिकारी अपने काम को प्रचार से बड़ा बनाने की कोशिश करते हैं,लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जिनके काम खुद उनकी पहचान बन जाते हैं। रायगढ़ में बीते एक वर्ष के दौरान प्रशासनिक गलियारों से लेकर गांव की चौपाल तक अगर किसी नाम की चर्चा सबसे अधिक हुई है,तो वह हैं बिल्कुल युवा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी।बिना शोर,बिना राजनीतिक बयानबाजी और बिना व्यक्तिगत प्रचार के उन्होंने जिस तरह प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय,जवाबदेह और परिणाममुखी बनाया,उसने आम जनता के भीतर शासन के प्रति भरोसा मजबूत किया है।उनकी कार्यशैली में सख्ती भी है, संवेदनशीलता भी… अनुशासन भी है और मानवीय दृष्टिकोण भी।शायद यही वजह है कि रायगढ़ में आज “काम बोलता है” सिर्फ एक कहावत नहीं,बल्कि प्रशासन की पहचान बन चुकी है।*रायगढ़।किसी जिले में जब युवा, ऊर्जावान और संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी नेतृत्व संभालता है,तो उसका असर केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि गांव,शहर,स्कूल, अस्पताल,किसान और आम नागरिक तक महसूस किया जाता है। रायगढ़ में पिछले एक वर्ष के दौरान कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की कार्यशैली ने इसी बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश की है।अपनी शांत, संयमित और “जीरो-डिस्क्रिप्शन” कार्यप्रणाली के लिए पहचाने जाने वाले कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने प्रचार-प्रसार से दूरी रखते हुए प्रशासनिक कार्यों को प्राथमिकता दी।यही वजह है कि बिना किसी अतिरिक्त प्रचार के उनका काम आज जिलेभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री से लेकर शासन के कई मंत्रियों तक ने सार्वजनिक मंचों से रायगढ़ प्रशासन की कार्यशैली की सराहना की है।*रायगढ़ फर्स्ट” विजन के साथ आगे बढ़ता प्रशासन*रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की कार्यशैली में सबसे खास बात “रायगढ़ फर्स्ट” की सोच रही। फैसलों से लेकर फील्ड विजिट तक हर जगह जिले और आम नागरिक को प्राथमिकता देने की झलक दिखाई दी।उन्होंने प्रशासन को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर उसे सीधे जनता से जोड़ने की कोशिश की। यही कारण है कि जनदर्शन अब सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाधान का प्रभावी माध्यम बन चुका है।जीरो-डिस्क्रिप्शन, हाई-परफॉर्मेंस मॉडल*प्रचार-प्रसार से दूरी बनाकर काम पर फोकस करना कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की सबसे बड़ी प्रशासनिक विशेषता मानी जा रही है। वे सोशल मीडिया या व्यक्तिगत ब्रांडिंग से ज्यादा जमीनी परिणामों पर भरोसा करते हैं।यही वजह है कि बिना किसी अतिरिक्त प्रचार के उनके कार्यों की चर्चा शासन स्तर तक पहुंची और मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों ने सार्वजनिक मंचों से रायगढ़ प्रशासन की सराहना की। *शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई मजबूती*किसी भी जिले की प्रगति का आधार शिक्षा और स्वास्थ्य होता है। बीते एक वर्ष में आईएएस डीएम मयंक चतुर्वेदी के नेतृत्व में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष फोकस किया गया। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी भी तेज हुई।वहीं स्कूलों में अधोसंरचना सुधार, शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में भी ठोस पहल देखने को मिली।योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन बना प्राथमिकता*सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने पारदर्शी व्यवस्था विकसित की। बिचौलियों की भूमिका कम करने, पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने और योजनाओं के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा से लोगों का भरोसा शासन पर मजबूत हुआ। कृषि क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने,नई तकनीकों को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए लगातार कार्य हुए। इसके साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों, स्थानीय हुनर और कुटीर उद्योगों को बाजार से जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी पहल की गई। सख्त प्रशासक,सहज व्यक्तित्व*कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की कार्यशैली में अनुशासन और संवेदनशीलता का संतुलन साफ दिखाई देता है। जहां प्रशासनिक मामलों में वे सख्त निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते,वहीं आम लोगों की समस्याओं को लेकर उनका व्यवहार सहज और संवेदनशील माना जाता है। उनकी यही कार्यशैली अधिकारियों और कर्मचारियों में न सिर्फ जवाबदेही का भाव पैदा करती है,बल्कि आम जनता में भरोसा भी मजबूत करती है। व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद कलेक्टर का सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव भी लगातार दिखाई देता है। विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों,जागरूकता अभियानों और जनहित से जुड़े आयोजनों में उनकी सहभागिता प्रशासन और समाज के बीच संवाद को मजबूत करती रही है। *सोशल लाइफ में भी सामाजिक सरोकार*व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद उनका जुड़ाव सामाजिक अभियानों और जनहित कार्यक्रमों से लगातार बना रहा। चाहे जागरूकता अभियान हों, सामाजिक आयोजन या जन संवाद— हर मंच पर उनका व्यवहार प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करता दिखाई दिया।*एक साल… और बदलती हुई तस्वीर*रायगढ़ में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के कार्यावधि में पिछले एक वर्ष के दौरान दिखाई दिए प्रशासनिक बदलाव यह साबित करते हैं कि यदि नेतृत्व ईमानदार,निर्णायक और प्रतिबद्ध हो,तो कम समय में भी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकता है।बहरहाल कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की कार्यशैली ने यह स्थापित किया है कि प्रशासन की असली पहचान प्रचार नहीं,बल्कि जनता तक पहुंचने वाला परिणाम होता है।